कड़कनाथ कुक्कुट इकाई योजना - किसानों के लिए कम लागत में लाखों कमाने का मौका
क्या आप भी उन हजारों छोटे किसानों में से हैं, जो खेती के साथ-साथ कुछ अतिरिक्त आमदनी के लिए मुर्गी पालन करना चाहते हैं, लेकिन महंगे चूजों, महंगी दवाइयों और सही जानकारी न मिलने के कारण पीछे हट जाते हैं? क्या आपने कई बार लोगों से पूछा कि अच्छी नस्ल के चूजे कहाँ मिलेंगे, बीमारी आने पर क्या करें, लेकिन किसी ने सही जवाब नहीं दिया? अगर हाँ, तो मध्य प्रदेश सरकार आपके लिए एक बहुत ही शानदार तोहफा लेकर आई है।
कड़कनाथ... नाम तो आपने सुना ही होगा। मध्य प्रदेश का गौरव, जिसे 'काला सोना' भी कहा जाता है। यह वही मुर्गा है जिसके लिए क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने भी झाबुआ से 2000 चूजे मंगवाए थे। आज इसी कड़कनाथ को हर किसान के घर-घर तक पहुँचाने के लिए सरकार खुद आगे आ रही है।
पहले होता क्या था कि कड़कनाथ का एक चूजा ही बाजार में 100-150 रुपये में मिलता था और 40 चूजे लेने के लिए 4000-6000 रुपये लग जाते थे, ऊपर से दाना, दवा और टीके का खर्च अलग। छोटे किसान के लिए यह बहुत बड़ी रकम थी। इसी परेशानी को समझते हुए पशुपालन विभाग ने तय किया कि क्यों न किसानों को सिर्फ 1100 रुपये में 40 चूजों की पूरी इकाई, दाने और दवाइयों के साथ दी जाए और बाकी का 75% खर्च सरकार खुद उठाए।
इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें आपको अकेला नहीं छोड़ा जाता। आपके फॉर्म पर ही दो लोगों के हस्ताक्षर की व्यवस्था है - एक आपके क्षेत्र के पशु डॉक्टर की और दूसरा आपके सरपंच की। इसका मतलब है कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि चूजे लेने के बाद भी आपको डॉक्टर की सलाह और पंचायत का सहयोग मिलता रहे।

तो अब बार-बार लोगों के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं है। आपका अपना 'डॉक्टर पोल्ट्री' और सरकार की यह योजना दोनों आपके साथ हैं। आइए, अब इस योजना को एक-एक बिंदु में विस्तार से समझते हैं ताकि आप इस फॉर्म को भरकर इसका पूरा लाभ ले सकें।

कड़कनाथ मुर्गा क्या है और इतना महंगा क्यों बिकता है?
कड़कनाथ मुर्गा मध्य प्रदेश के झाबुआ, अलीराजपुर, धार और बड़वानी जिलों की मूल नस्ल है। इसे भारत सरकार द्वारा GI टैग भी मिल चुका है। इसकी खासियत है:
- इसका मांस, हड्डी, खून सब काले रंग का होता है।
- इसमें सामान्य मुर्गे के मुकाबले 25% ज्यादा प्रोटीन और बहुत कम कोलेस्ट्रॉल होता है।
- इसमें औषधीय गुण होते हैं, यह दिल और फेफड़ों के रोगियों के लिए फायदेमंद माना जाता है।
- बाजार में सामान्य मुर्गा 250-300 रुपये किलो बिकता है, जबकि कड़कनाथ 1000 से 1200 रुपये किलो तक बिकता है। इसका एक अंडा 40-50 रुपये का बिकता है।
- इसी वजह से इसकी मांग पूरे भारत में हमेशा बनी रहती है।
योजना का उद्देश्य क्या है?
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इस योजना के दो मुख्य उद्देश्य हैं:
- कुक्कुट पालन के माध्यम से हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना।
- कड़कनाथ नस्ल का संरक्षण एवं संवर्धन करना।
योजना में क्या-क्या मिलता है ?
इस योजना को "अनुदान पर कड़कनाथ चूजे का प्रदाय" भी कहते हैं। सरकार आपको एक पूरी इकाई देती है।
एक इकाई में शामिल है: बिना किसी लिंग भेद के 28 दिन के 40 उन्नत नस्ल के कड़कनाथ चूजे, उनका टीकाकरण, दवाइयाँ, और 28 दिन का कुक्कुट आहार, और परिवहन बॉक्स।
योजना की लागत और सब्सिडी का गणित - सबसे जरूरी बात
आपके फॉर्म में लिखी सहमति में इसका जिक्र है - "इकाई लागत का 25 प्रतिशत अंश राशि रुपये 1100/- जमा करने हेतु सहमत हूँ।
पूरा हिसाब इस तरह है:
- कुल इकाई लागत: 4300 से 4400 रुपये (कुछ जिलों में थोड़ा अंतर)
- 40 चूजे x 65 रुपये = 2600 रुपये
- औषधि/टीकाकरण x 5 रुपये = 200 रुपये
- परिवहन + चिक बॉक्स = 210 रुपये
- 28 दिन का दाना - 53.76 किलो x 24 रुपये = 1290 रुपये
सरकारी अनुदान (सब्सिडी): कुल लागत का 75% यानी लगभग 3300 रुपये सरकार देगी।
किसान का हिस्सा: कुल लागत का सिर्फ 25% यानी सिर्फ 1100 रुपये आपको जमा करना है।
मतलब 1100 रुपये में आपको 40 चूजों से अपना व्यवसाय शुरू करने का मौका मिल रहा है।
पात्रता - कौन आवेदन कर सकता है ?
यह योजना मध्य प्रदेश के सभी जिलों में लागू है और सभी वर्गों के लोग पात्र हैं।
- आवेदक मध्य प्रदेश का मूल निवासी हो।
- उम्र 18 वर्ष से अधिक हो।
- सभी वर्ग - सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसान, महिला, स्वयं सहायता समूह की सदस्य पात्र हैं।
- आपके पास मुर्गी पालन का थोड़ा अनुभव या प्रशिक्षण हो तो प्राथमिकता मिलती है।
आवेदन कैसे करें - आपके फॉर्म में क्या भरना है ?
1.आवेदक का नाम, 2. पिता/पति का नाम, 3. वर्ग (सामान्य/SC/ST), 4. पूरा पता, 5. मोबाइल नंबर, 6. आधार नंबर, 7. शैक्षणिक योग्यता, 8. कुक्कुट पालन का अनुभव, 9. परिवार की वार्षिक आय, 10. वर्तमान में उपलब्ध मुर्गियों की संख्या, 11. निकटतम पशु चिकित्सा संस्था का नाम व दूरी, 12. बैंक खाता क्रमांक, बैंक का नाम व शाखा।
भाग-2: सहमति पत्र
भाग-3: पशु चिकित्सा शल्यज्ञ की अनुशंसा
भाग-4: ग्राम पंचायत / सरपंच का प्रमाण पत्र
इसमें सरपंच यह प्रमाणित करेगा कि आप उसी गाँव के निवासी हैं और आपको कुक्कुट पालन का अनुभव है, इसलिए आपको इकाई प्रदान करने की अनुशंसा की जाती है।
कड़कनाथ कुक्कुट इकाई योजना - अनुबंध पत्र क्या है और क्यों जरूरी है?
ये अनुबंध पत्र उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएँ, जिला भोपाल और आपके बीच होता है। इसमें आप सरकार को 7 वादे करते हैं। यही वादे आपको एक सफल पोल्ट्री फार्मर बनाते हैं।
अनुबंध पत्र में लिखे 7 नियमों का आसान मतलब:
नियम 2 - योजना अंतर्गत इकाई लागत का 25% हितग्राही अंश मैं कार्यालय में जमा करूंगा/करूंगी।
नियम 3 - प्राप्त चूजों को पशु चिकित्सक के मार्गदर्शन में पालूंगा/पालूंगी और असामान्य मृत्यु होने पर निकटतम अस्पताल को सूचित करूंगा/करूंगी।
नियम 4 - लो इनपुट टेक्नोलॉजी के चूजे स्वयं से क्रय करते हुए निरंतर कुक्कुट पालन का कार्य करूंगा/करूंगी और इसे व्यवसाय के रूप में अपनाऊंगा/अपनाऊंगी।
नियम 5 - मैं अधिकारी को मदर यूनिट का समय-समय पर निरीक्षण करने में सहयोग करूंगा/करूंगी।
नियम 6 - चूजों को सभी आवश्यक टीकाकरण कराते हुए स्वास्थ्य सुरक्षा का पूर्ण ध्यान रखूंगा/रखूंगी।
नियम 7 - विभाग द्वारा समय-समय पर दिये गये निर्देशों का पालन करूंगा/करूंगी।
अंत में क्या भरना है?
नीचे स्थान, दिनांक लिखकर अपने हस्ताक्षर करने हैं और 2 गवाहों के नाम लिखने हैं।
किसान के लिए टिप: इस अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर करने से डरें नहीं। यह सरकार का आप पर भरोसा है कि आप 1100 रुपये की मदद को 30,000 रुपये की कमाई में बदल सकते हैं। इस अनुबंध को संभाल कर रखें, यही आपके चूजे प्राप्त करने का प्रमाण है।
आवश्यक दस्तावेज
फॉर्म के साथ ये दस्तावेज लगाना अनिवार्य है:
- आधार कार्डवोटर आईडी / राशन कार्ड
- पासपोर्ट साइज
- फोटोबैंक पासबुक की फोटोकॉपी
- जमीन से संबंधित कागज (यदि हो)
चयन प्रक्रिया
आपका फॉर्म भरने के बाद ग्राम सभा में रखा जाता है, फिर जनपद पंचायत की बैठक में स्वीकृति होती है, और अंतिम अनुमोदन जिला पंचायत की स्थायी समिति द्वारा किया जाता है। चयन में महिलाओं, विधवाओं, भूमिहीन और छोटे किसानों को प्राथमिकता दी जाती है।
कहाँ संपर्क करें ?
आवेदन जमा करने के लिए अपने जिले के निकटतम पशु चिकित्सालय, पशु चिकित्सा अधिकारी या उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएँ कार्यालय में संपर्क करें। भोपाल जिले के लिए कार्यालय का पता फॉर्म पर ही लिखा है - बेरसिया रोड, भोपाल।

पालन कैसे करें और कितना मुनाफा होगा ?
डॉक्टरों के अनुसार कड़कनाथ की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत मजबूत होती है। ये खुले वातावरण में आसानी से पल जाते हैं और कीड़े-मकोड़े, घास और घरेलू दाने से ही अपना भोजन जुटा लेते हैं, जिससे दाने का खर्च कम आता है।
40 चूजे 3-4 महीने में 1 से 1.5 किलो के हो जाते हैं। अगर आप 30 मुर्गे भी 1000 रुपये किलो के हिसाब से बेचते हैं, तो एक बार में 30,000 से 35,000 रुपये की आय हो सकती है। जबकि आपका खर्च सिर्फ 1100 रुपये + थोड़ा अतिरिक्त दाना है। अंडों से भी हर महीने 4000-5000 रुपये की अतिरिक्त आय होती है।
आवेदन पत्र डाउनलोड करे।
कुक्कुट इकाई हेतु हितग्राही का आवेदन पत्र.pdf
कड़कनाथ कुक्कुट इकाई योजना अंतर्गत.docx